(बेटी के ब्याह का लिबास दिखाऊ)
आओ अय्याशियो मे डुबे हुये चौथे स्तंभ,
तुम्हे इस मुल्क मे रेप से इतर,
खेत के मेड़ पे पड़ी बीना कफ़न--------
किसान की लाश दिखाऊ।
बंद कमरे मे बरसता सावन,
तीतर-बीतर कपड़े पैमाने से छलकी शराब,
किसान की आँखो मे सुखा,
उसकी दुपट्टे के फंदे से मरी बेटी,
रुदाली सी बीबी,लंबा सन्नाटा
उसकी जंग खाई पेटी में,
एै,रंग------------
बेटी के ब्याह का लिबास दिखाऊ।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758